Sunday, 27 December 2015

भाना

        भाना 


रौंतेला मुल्क माँ  कख होली भाना
फूलों का बीच भग्यान
झपन्याली डाली  सि झूमणि होली
बोण माँ अजाण  बिराण
कख हरची तेरी गुन्द्क्यालि मुखडी
कख तेरा कौल करार
कख लुकि तेरा अंख्यों का सुपिना
कख तेरा रन्त रैबार
कख होलु तेरु रूप खतेणु
कख छ माया कु बाज़ार
देखि देखि क आँखि थाकिगे
कन्डूड़ी लेगे बय्याँण
रौंतेला मुल्क माँ  कख होली भाना
फूलों का बीच भग्यान
झपन्याली डाली  सि झूमणि होली
बोण माँ अजाण  बिराण

सौण की कुयेडी जनु  रूप तेरु
फूलो सी खिल खिल जांदी
काँस की थाळी सी धवड़ी  तेरी
माया कु बाटू बतान्दी
अता    पता ठौर ठिकाणु
कई देश बटि तू  आन्दी
भादों की  बरखा सी जेठ कु घाम
कानके होली पछाण
रौंतेला मुल्क माँ  कख होली भाना
फूलों का बीच भग्यान
झपन्याली डाली  सि झूमणि होली
बोण माँ अजाण  बिराण

दुनिया माँ नी अब पैलू सी मेल
बदलेगी भौण मिजाज
दिख्यांदा नि त्यारा गीतू का रौंसिया
वो संगीत   साज
धक धक नि धक्धयांदी कैकि जिकुड़ी
बडुली  ना पराज
आ चली जौला दुनिया सी दूर
बण जौला पंछी पराण
रौंतेला मुल्क माँ  कख होली भाना
फूलों का बीच भग्यान
झपन्याली डाली  सि झूमणि होली
बोण माँ अजाण  बिराण

          भगवान सिंह  रावत          (सर्वाधिकार सुरक्षित )


Wednesday, 14 November 2012

मयारू उत्तराखंड



कख छ मयारू उत्तराखंड 
कख गढ़ों  कु देश ।
गद्न्य्नो सुखीगे पाणी 
कख हिंसर किन्गोड़ धाणी ।
पुन्ग्डियो माँ आग लेगे 
भटकंदी  रेगे पराणी ।
लाल लाल फूल बुरांस 
लेणु घुटी घुटी सांस ।
बरखा की भी बूँद नि छ 
कनके बौड़ली आस ।
जंगलु का छिन बुरा हाल 
कुर्सी माँ बैठ्या दलाल ।
प्रजा भूखी प्यासी रेगे 
अधिकारी पर मालामाल ।
सब सफा सुनपट हुइगे 
आम आदमी देखदी रेगे ।
मायूसी लाचारी कु रास्ता 
जिंदगी हम तैं बतैगे ।
हरी भरी धरती न कनके 
बदली अपडू एनु भेष ।
कख छ मयारू उत्तराखंड
कख गढ़ों  कु देश ।
नेता जी देणा आवाज 
मी तैं जीतावा  आज ।
विश्वास अर धैर्य धरा 
नि छों चकडीत बाज । 
मी यूँ जंगलु बचौलो 
एक नयु कानून ल्योलू ।
रोज देखा नई सरकार 
रोज होणु छ परचार ।
पुंगड्यों माँ कुछ नि होंदु 
पर नेताओं की पैदावार ।
रोज बणदी नई बात 
ढाक का  बस तीन पात ।
देखणी जनता बिचारी 
कनी मायूसी अर लाचारी ।
 न अपणी सी न बिराणी 
सारी  योजना काणी ।
दुनिया माँ उत्तराखंड कु 
कनु होलू सन्देश 
कख छ मयारू उत्तराखंड
कख गढ़ों  कु देश ।

(भगवान  सिंह रावत )

Tuesday, 13 November 2012

उत्तराखंडी वीर


जाग उत्तराखंडी वीर  जाग जाग और जगा 
विपत्ति मै पहाड़ है विजय ध्वजा उठा उठा 
रंगों का उत्सव नहीं ये तो रक्त फाग है 
प्रेम की बंसी पे छिड़ा मौत का ये राग है 
शत्रु  तेरे सामने तुणीर ओ तरकश उठा .....जाग उत्तराखंडी वीर
अमन ओ चैन हो यहाँ तू भेद भाव तोड़ दे 
सब को सब समझ सकें तू दिलों को जोड़ दे 
नफरतों की आँधियों मै प्यार के दीपक जला ....जाग उत्तराखंडी वीर
सपूत है धरा तू धरा के गीत गाये जा 
जान की बाजी लगे तो हंस के तू लगाये जा 
पुजारी हैं हम प्रेम के सबको  तू बता बता  
जाग उत्तराखंडी वीर  जाग जाग और जगा 
विपत्ति मै पहाड़ है विजय ध्वजा उठा उठा.

मेरी मायादार


मेरी मायादार

मेरी मायादार  तेरी माया  कनी स्वाणी
सर्र रर  बथों जानो  जानो ठंडो पाणी
सड्कियो का मोड़  जना
गद्नियों का छोड़ जना
घनघोर जंगलु माँ
ऊँचा ऊँचा पौड जना
काफुआ हिलांस  जनि -मी थैं बुलाणी......
मेरी मायादार  तेरी माया  कनी स्वाणी
फूलों माँ जन बुरांस
पुन्ग्डियो माँ हरो घास
अर जानो ऊँचो आकाश
जेठ को  तैल्लो घाम
सौण को बाथूवाणी......
मेरी मायादार  तेरी माया  कनी स्वाणी 
 नजर सी भी नी दिखेंदी
कन्दोडीयो भी नी सुनेंदी
हांथू से भी नी छुयेंदी
कनके वा धावो लगान्दी
युग बीती गेइना पर
कैन नी पछाणी..........  मेरी मायादार  तेरी माया  कनी स्वाणी
सर्र रर  बथों जानो  जानो ठंडो पाणी